राजधानी में नगर निगम की कार्रवाई तेज़, सात लोगों की जान लेने वाली इमारत ढहने की घटना के बाद पाँच अधिकारी निलंबित।
दिल्ली प्रशासन ने बिना अनुमति वाली पाँचवीं मंज़िलों के ख़िलाफ़ तत्काल सीलिंग अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब नियमित जाँच से आगे बढ़कर मौके पर ही ऐसे अवैध निर्माणों को बंद किया जा रहा है जो रहने वालों की सुरक्षा के लिए सीधा ख़तरा हैं।
क्या हुआ
शहर में हाल ही में एक इमारत ढहने से सात लोगों की मृत्यु हो गई, जिसके बाद प्रशासन ने तेज़ कदम उठाए। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने आदेश दिया कि जिन इमारतों में बिना मंज़ूरी वाली पाँचवीं मंज़िल पाई जाए, उन्हें तुरंत सील कर दिया जाए। नगर निगम अधिकारी पूरे शहर में कमज़ोर और पुरानी इमारतों की पहचान करने का अभियान भी तेज़ कर रहे हैं।
क्यों अहम है
यह कार्रवाई ऊर्ध्वाधर अवैध निर्माण के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति दिखाती है। घातक हादसे के बाद पाँच अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जो यह संकेत देता है कि प्रवर्तन में ढिलाई पर सीधी पदीय ज़िम्मेदारी तय होगी। संपत्ति मालिकों के लिए इस आदेश का मतलब है – सीलिंग की आशंका और तोड़फोड़ का आर्थिक जोखिम।
विशेषज्ञ की राय
रियल एस्टेट के नज़रिए से, जिस संपत्ति में बिना मंज़ूरी वाली पाँचवीं मंज़िल है, उस पर तत्काल सीलिंग का ख़तरा मंडरा रहा है, जिससे उसकी लेन-देन की कीमत रातों-रात गिर सकती है। ख़रीदार और बैंक अब सौदे से पहले नगर निगम की ताज़ा जाँच की माँग कर सकते हैं, जिससे जाँच-परख के मानक सख़्त होंगे। ऐसी इन्वेंट्री रखने वाले विक्रेताओं को या तो लंबी होल्डिंग अवधि झेलनी पड़ेगी या अनुपालन की मजबूरी में खर्च करना होगा।
खरीदारों को क्या जाँचना चाहिए
किसी भी अनुबंध पर दस्तख़त करने से पहले स्थानीय नगर निकाय से स्वीकृत भवन योजना और मंज़ूर मंज़िलों की संख्या सत्यापित करें। ऑक्यूपेंसी-कम-कम्पलीशन सर्टिफ़िकेट ज़रूर देखें जो भौतिक संरचना से मेल खाता हो। अगर संपत्ति में स्वीकृत योजना से अधिक मंज़िलें दिखें, तो इसे चेतावनी का संकेत मानें – सील की गई संपत्ति निवेश और क़ानूनी उपाय, दोनों को बंद कर सकती है।
जानकारी स्रोत: ET Realty, दिनांक 2026-09-08।