उत्तर प्रदेश की Rs 18,730 करोड़ की एक्सप्रेसवे मंजूरियां पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में आवास, लॉजिस्टिक्स और कमर्शियल मांग के नए अवसर बना सकती हैं।
उत्तर प्रदेश ने करीब Rs 18,730 करोड़ की लागत वाली दो एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है। यह Rs 24,000 करोड़ के व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का हिस्सा है। मेरठ-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार और 106.3 किलोमीटर लंबा झांसी लिंक एक्सप्रेसवे पूरी तरह राज्य सरकार के वित्तपोषण से बनाए जाएंगे। SquareYards Blog की 2026-09-04 की रिपोर्ट के अनुसार, इन परियोजनाओं से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के नए कॉरिडोरों में रियल एस्टेट गतिविधि को बढ़ावा मिल सकता है।
क्या हुआ
राज्य ने मेरठ-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार के लिए Rs 10,761 करोड़ और झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए Rs 7,968.30 करोड़ आवंटित किए हैं। दोनों कॉरिडोर छह लेन के होंगे और इनमें भविष्य में विस्तार की व्यवस्था रहेगी। परियोजनाएं UPEIDA के माध्यम से आगे बढ़ाई जा रही हैं।
मेरठ-हरिद्वार कॉरिडोर मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और हरिद्वार के बीच कनेक्टिविटी सुधारने के लिए प्रस्तावित है। इससे हरिद्वार की ओर पर्यटन और व्यापार संपर्क भी मजबूत होने की उम्मीद है।
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे जालौन के फूलपुरा के पास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को झांसी के अंबाबाई में NH-44 से जोड़ेगा। इसका उद्देश्य बुंदेलखंड के औद्योगिक इकोसिस्टम और झांसी डिफेंस कॉरिडोर को समर्थन देना है।
UPEIDA की योजनाओं में वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग और अन्य उद्योगों के साथ शिक्षा, चिकित्सा और सैटेलाइट सिटी विकास के अवसर भी शामिल हैं। झांसी उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड में से एक है। इन छह नोड के लिए 5,125 हेक्टेयर से अधिक भूमि प्रस्तावित है।
इसका असर क्यों पड़ेगा
बेहतर सड़क संपर्क और औद्योगिक गतिविधि से लखनऊ और NCR जैसे स्थापित केंद्रों के बाहर कामगारों के आवास, प्लॉटेड डेवलपमेंट, किराये के घरों, रिटेल और कमर्शियल स्पेस की मांग बढ़ सकती है।
बुंदेलखंड की योजना में जालौन, हमीरपुर, बांदा और चित्रकूट जैसे जिलों को आगरा-लखनऊ और यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए बड़े बाजारों से जोड़ने की बात है। इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यक्रम के साथ घोषित सुल्तानपुर मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर भी सड़क निवेश को उत्पादन से जोड़ता है।
मौजूदा बाजारों के आंकड़े इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े इलाकों की स्थिति का संदर्भ देते हैं। नॉर्थ लखनऊ में कीमत Rs 6,950 प्रति वर्ग फुट है, जो सालाना आधार पर 14.73% ऊपर है। वेस्ट लखनऊ में कीमत Rs 6,850 प्रति वर्ग फुट है, जिसमें 14.98% की सालाना बढ़ोतरी हुई है। लखनऊ में अपार्टमेंट की कीमतों में 6.42% वृद्धि दर्ज की गई है।
यमुना एक्सप्रेसवे माइक्रोमार्केट में कीमत Rs 9,700 प्रति वर्ग फुट है, जो 5.13% ऊपर है। सेक्टर 25 में कीमत Rs 9,000 प्रति वर्ग फुट है और हाल की अवधि में 8.9% बढ़ी है। सेक्टर 23D में यह Rs 7,650 और सेक्टर 22A में Rs 9,850 प्रति वर्ग फुट है। ये आंकड़े नए एक्सप्रेसवे कॉरिडोरों के लिए पूर्वानुमान नहीं हैं।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण
SquareYards Blog के बाजार आंकड़े दिखाते हैं कि मौजूदा बाजारों में कनेक्टिविटी और प्रॉपर्टी मांग के बीच संबंध देखा जा रहा है। नए एक्सप्रेसवे कॉरिडोरों में भी मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, रोजगार और उनसे जुड़ी आवासीय व कमर्शियल जरूरतों के जरिए विकास की प्रक्रिया बन सकती है। हालांकि उपलब्ध आंकड़े मेरठ-हरिद्वार और झांसी कॉरिडोरों के लिए कीमत या रिटर्न का अनुमान नहीं देते।