ET Realty ने 24 सितंबर 2026 को बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा में फ्लैट का कब्जा देर से मिलने के मामले में होमबायर के ब्याज मांगने के अधिकार को फिर से बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि देर से कब्जा स्वीकार कर लेने से ब्याज का दावा खत्म नहीं होता।
क्या हुआ
Antriksh Developers and Promoters Pvt Ltd ने अदालत के पहले के फैसले को चुनौती दी थी। डेवलपर का तर्क था कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की पाबंदियों से निर्माण कार्य प्रभावित हुआ।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डेवलपर की दलीलें खारिज कर दीं और कब्जा देने में हुई लंबी देरी के लिए ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया।
इसका महत्व
फैसला बताता है कि देर से मिला फ्लैट स्वीकार करने के बाद भी होमबायर उस देरी के लिए ब्याज मांग सकता है। मामला नोएडा के एक फ्लैट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की पाबंदियों को लेकर डेवलपर की दलील से जुड़ा है।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण
इस मामले में ध्यान कब्जा देने में हुई देरी और डेवलपर की ओर से बताई गई वजह पर रहा। अदालत ने यह दलील स्वीकार नहीं की कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की पाबंदियों के कारण डेवलपर को होमबायर को ब्याज देने की जिम्मेदारी से छूट मिल जाती है।
खरीदार क्या जांचें
देर से कब्जा मिलने वाले होमबायर कब्जे की समयसीमा, देरी के लिए डेवलपर की बताई वजह और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की पाबंदियों पर दी गई दलील की जांच करें। उन्हें अपने मामले में ब्याज को लेकर अदालत के निर्देश को भी देखना चाहिए।
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